देश के राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने रविवार को विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन यानी VB-G RAM G विधेयक 2025 को अपनी स्वीकृति दी जो मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह लेता है। किसने कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन की गारंटी सुनिश्चित की जाएगी जो मनरेगा में पहले सिर्फ 100 दिन की थी।
मनरेगा से क्यों है बेहतर VB –G RAM G
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा की जगह लेने VB –G RAM G नए कानून के तहत ग्रामीणों को 125 दिन की रोजगार गारंटी सुनिश्चित होगी। बुवाई और कटाई के चरम सीजन में कृषि से संबंधित गतिविधियों के लिए कृषि श्रम की उपलब्धता आसान करने को यह अधिनियम राज्यों को एक वित्त वर्ष में कुल 60 दिनों की विराम अवधि अधिसूचित करने का अधिकार देगा।
इस कानून के तहत कराए जाने वाले कार्यों को भी सरकार ने तय कर दिया है इसके तहत चार प्राथमिक क्षेत्र है जिसमें जल सुरक्षा एवं जल से संबंधित कार्य ग्रामीण और संरचना आजीविका से संबंधित अवसर रचना और प्रतिकूल मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले काम कार्य तय करने का अधिकार पंचायत तो को दिया गया है
भुगतान की भी प्रक्रिया होगी तेज
इस अधिनियम में मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या किसी भी स्थिति में कार्य की समाप्ति के 15 दिन के भीतर किए जाने की अनिवार्यता है देरी होने पर अविलंब मुआवजा दिया जाएगा ।
विकसित भारत 2047 के विजन में अहम योगदान
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नए कानून को ग्रामीण रोजगार व विकास ढांचे में निर्णायक स्तर बताया है कहा बीवी जी राम जी कानून का मकसद गांव में रहने वाले श्रमिकों किसानों का भूमिहीन परिवारों की आई बढ़ाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है जिस गांव में गरीबी कम होगी और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिलेगा इसमें समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है,ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे सरकार ने दावा किया है कि यह कानून महिलाओं कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने की है भूमिका निभाएगा। जिससे भारत को वर्ष 2047 तक विकसित बनाने के लक्ष्य को पूरा कर सके ।
प्रेट् के अनुसार ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान निर्णय योजना को मनरेगा से एक कदम आगे बताते हुए , एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा की बीवी जी राम जी योजना के तहत 1,51,282 करोड रुपए आवंटित किए जाएंगे ताकि ग्रामीण रोजगार के लिए पर्याप्त धन सुनिश्चित किया जा सके।
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