Kanpur: रविवार की दोपहर शहर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक आंदोलनकारी छात्रों के उग्र होते दिखाई पड़े। देखते ही देखते पथराव, आगजनी और फायरिंग की आवाज़ों से पूरा इलाका दहशत में आ गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े, वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया और कुछ ही देर में हालात पर काबू पा लिया।
लेकिन जब धुआं और हलचल थमी तो सच्चाई कुछ यूं सामने आई कि यह कोई असली दंगा नहीं, बल्कि कानपुर पुलिस की मॉक ड्रिल थी।
सद्भावना चौकी के पास हुआ अभ्यास
रविवार को सद्भावना चौकी के पास दंगा नियंत्रण (Riot Control) के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान एक विशेष स्क्रिप्ट के तहत यह परिदृश्य तैयार किया गया कि छात्रों का एक समूह अपनी मांगों को लेकर उग्र हो गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठीचार्ज जैसे सभी आधुनिक साधनों का उपयोग किया।

सिपाहियों ने पुलिस कमिश्नर का रास्ता रोका
ड्रिल के दौरान एक दिलचस्प वाकया भी हुआ। जब पुलिस कमिश्नर सिविल ड्रेस और प्राइवेट कार में मौके पर तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे, तो सुरक्षा घेरा इतना सख्त था कि सिपाहियों ने उन्हें तीन जगहों पर रोक लिया। साहब का परिचय देने के बाद ही वाहन को आगे बढ़ने की अनुमति मिली। सिपाहियों की यह सतर्कता देखकर पुलिस कमिश्नर का चेहरा खिल उठा।
असली दंगे जैसा नजारा, लोगों में खौफ
मॉक ड्रिल इतनी वास्तविक थी कि कुछ समय के लिए आम लोग इसे असली दंगा समझ बैठे। सड़क पर आगजनी के निशान, चारों तरफ बिखरे पत्थर, और फायरिंग की आवाज़ों ने लोगों को भयभीत कर दिया। डीसीपी मुख्यालय एस.एम. कासिम आबिदी और डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह ने पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब हालात काबू से बाहर होते दिखे, तो पुलिस ने पूरा एक्शन मोड अपनाया।
पानी की तेज बौछारें, आंसू गैस और फिर लाठीचार्ज—कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका खाली करा लिया गया।
आम जनता ने की पुलिस की सराहना
स्थानीय लोगों ने पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि समय समय पर मॉकड्रिल होने जरूरी है । जिससे पुलिस के साथ साथ आम जनता भी भविष्य में होने वाली अप्रिय घटनाओं के लिए तैयार हो सके ।
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